॥ अथ दधिमथी स्त्रोतम् ॥
॥ अथ दधिमथी स्त्रोतम् ॥
जय जय जनक सुनन्दिनी, हरि वन्दिनी हे।
दुष्ट निकन्दिनी मात, जय जय विष्णु प्रिये।
सकल मनोरथ दायनी, जग सोहिनी हे।
पशुपति मोहिनी मात, जय जय विष्णु प्रिये।
विकट निशाचर कुंथिनी, दधिमंथिनी हे।
त्रिभुवन ग्रंथिनी मात, जय जय विष्णु प्रिये।
दिवानाथ सम भासिनी, मुख हासिनी हे।
मरुधर वासिनी मात, जय जय विष्णु प्रिये।
जगदंबे जय कारिणी, खल हारिणी हे।
मृगरिपुचारिनी मात, जय जय विष्णु प्रिये।
पिपलाद मुनि पालिनी, वपु शालिनी हे।
खल खलदायनी मात जय जय विष्णु प्रिय।
तेज – विजित सोदामिनी, हरि भामिनी हे।
अहि गज ग्रामिनी मात, जय जय विष्णु प्रिये।
घरणीघर सुसहायिनी, श्रुति गायिनी हे।
वांछित दायिनी मात जय जय विष्णु प्रिये।


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